जिन्दगी क्या है कुछ नही तेरे बिना
ज़िन्दगी क्या है कुछ नहीं तेरे बिना
सुबह होती है तो शाम तलाशती है आंखे तेरे बिना.
रात होती है बिन चांदनी के जैसे तेरे बिना
सागर तो है पर जैसे पानी नहीं तेरे बिना.
हाँ तेरे बिना हाँ तेरे बिना
क्या था मैं और क्या हो गया हूँ तेरे बिना
क्यूँ रोतीं है आंखे बिन आसूं के तेरे बिना.
क्यूँ बैठे बैठे खो जाते है हम तेरे बिना.
चलते चलते जैसे रस्ते ही कही खो जाते है तेरे बिना
साथ तेरा मिला ना मिला ओ यार मेरे
वादा है तुझसे जिंदगी ये जी लेंगे फिर भी हम तेरे बिना
mast he yaar,,,very excellent poetry
ReplyDeletebhaiya ye poem kiske liye hai? vese hai bahut achi...
ReplyDeletekise ayse ke liye jo mere life mai ayi he nhi abhi tak
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