some nice poetry
Tuesday, July 27, 2010
raat bake thi per mai soya nhi
याद अयी तेरी हर पल मुझॆ पर मै रोया नही.
जाना था बहुत दुर अगले दिन मुझे ,
पर मन्जिल का पता याद आया नही.
मुस्कुराता रहा उन पलो को याद कर कर के,
जब साथ थे हम ,पर तुम पर जताया नही.
सवेरा हो गया इसी कश्म्क्श मे की कह दु आज तुम्हे,
पर कह पाया नही.
चल दिया अन्जानी राह पर बिन बताये किसी को ,
जो गया फ़िर लौट के आया नही.
हान फ़िर लौट के आया नही.
For u arvind my dear friend
सारे नाते तोड के हमसे क्यों जुदा हो गया,
अब हर हवा का झोंका तेरी याद दिला जाता है,
तेरे ना होने का एहसास करा जाता है,
वो लपटों में जलता बदन तेरा हर रात नज़र आता है,
आकर सपनों में खून के आँसू मुझे रुला जाता है,
बातें ये कई आज भी दिल को टीस देती हैं,
फ़ूलों से सजी अर्थी तेरी सोने नहीं देती हैं,
माफ़ी तुझसे माँगने का तो मैं हकदार नहीं,
हाँ जानता हूँ इन सब बातों का अब कोई आधार नहीं,
तू हो ना हो इस दुनिया में आज पर तेरे होने का एहसास हुआ कम नहीं,
हाँ तेरे होने का एहसास हुआ कम नहीं....
Wednesday, July 21, 2010
anjane he koi mujhai kuch kaha jata hai
अनजाने ही कोई मुझसे कुछ कह जाता है,
अपनी शख्सियत की झलक मेरी आँखों में छोड जाता है,
उसके हर गम और खुशी के एहसास को अपना बना लेता हूँ मैं,
अनजानी सी शख्सियत को बतलाता हूँ मैं,
उसके हर सपनों की तसवीर बनाता हूँ मैं,
उस अनकही आवाज को कागज पर उतारता हूँ मैं,
एक कहानी किसी अनजान की कह जाता हूँ मैं,
कोई अनजाने ही मुझे कुछ कह जाती है,
और मुझे कहानीकार बनने को मजबूर कर जाती है...bhor ka suraj thi mere jindge
भोर का सूरज थी मेरी जिंदगी,
हर दिन एक नई उमंग थी मेरी जिंदगी,
पंछी जो गाये संगीत थी मेरी जिंदगी,
मैं कवि और कविता थी मेरी जिंदगी,
रंगों में घुली थी मेरी जिंदगी,
एक ऐसी रंगोली थी मेरी जिंदगी,
फ़िर वो रात का पहर आया और खोता रहा मेरा साया,
रंगों की होली भी गुम हो गयी,
कविता भी पन्नों में कहीं खो गयी,
मैं गुमसुम अकेले इस ओर रह गयी,
सोचते हुए ही मैं उस रात सो गई,
और जब उठी तो देखा फ़िर एक नई भोर हो गई,
वो भोर नहीं शुरुवात एक और हो गई..Dil roya bus awaz nhi ayi
नींद सी आँखों में घुलने लगी,
सपनों की दुनिया पिघलने लगी,
बातों ही बातों में, बस कुछ मुलाकातों में,
एक तसवीर सपनों में दिखने लगी,
चेहरा था उसमें एक प्यारा सा,
कुछ जाना, कुछ अनजाना सा,
वो चेहरा क्यों मुझको सताने लगा,
आकर रातों में मुस्कुराने लगा,
मुस्कुराती वो आई, थामी जो कलाई,
ऐसा लगा बस आँखें भर आईं,
प्यार इतना कभी देखा ना था,
पर जब आँखें खुली तो कोई ना था,
था तो बस मैं और मेरी तन्हाई,
दिल रोया मेरा, बस आवाज ना आई...Tuesday, May 11, 2010
maa
देख के तेरी पहली झलक ही ,मे रोते से खिल्खिलाया था.
गोद मे भर के जो देखा तुने ,तुझ्मे भगवान ही नजर मुझे आया था.
सारा सन्सार ही उस वक्त मेने सामने ही खडा पाया था.
पहला कदम जो रखा मेने,तब तुने ही मुझे सम्भाला था.
मेरी हर गल्ती को माफ़ कर,आन्च्ल मे अपने मुझे छुपाया था.
जब कभी मै बीमार हुआ, तुने आन्खो-२ मे दिन गुजारा था.
रो -२ के अप्ने आन्सुवो से जखमो को मेरे भर डाला था.
मा मेरी तुने बच्चे को दिल के टुकडे की तर्ह पाला था.
हा मान्ता हु अह्सानो को तेरे मै कभी चुका ना पाउगा.
पर वादा है तुझ्से तेरी एक आह पर ,दुनिया हिला मै जाउन्गा.