ऎ यार तू क्यों खफ़ा हो गया,
सारे नाते तोड के हमसे क्यों जुदा हो गया,
अब हर हवा का झोंका तेरी याद दिला जाता है,
तेरे ना होने का एहसास करा जाता है,
वो लपटों में जलता बदन तेरा हर रात नज़र आता है,
आकर सपनों में खून के आँसू मुझे रुला जाता है,
बातें ये कई आज भी दिल को टीस देती हैं,
फ़ूलों से सजी अर्थी तेरी सोने नहीं देती हैं,
माफ़ी तुझसे माँगने का तो मैं हकदार नहीं,
हाँ जानता हूँ इन सब बातों का अब कोई आधार नहीं,
तू हो ना हो इस दुनिया में आज पर तेरे होने का एहसास हुआ कम नहीं,
हाँ तेरे होने का एहसास हुआ कम नहीं....
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