Wednesday, July 21, 2010

anjane he koi mujhai kuch kaha jata hai

अनजाने ही कोई मुझसे कुछ कह जाता है,

अपनी शख्सियत की झलक मेरी आँखों में छोड जाता है,

उसके हर गम और खुशी के एहसास को अपना बना लेता हूँ मैं,

अनजानी सी शख्सियत को बतलाता हूँ मैं,

उसके हर सपनों की तसवीर बनाता हूँ मैं,

उस अनकही आवाज को कागज पर उतारता हूँ मैं,

एक कहानी किसी अनजान की कह जाता हूँ मैं,

कोई अनजाने ही मुझे कुछ कह जाती है,

और मुझे कहानीकार बनने को मजबूर कर जाती है...

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