सरह्द पर खडा जवान सोचॆ ये सुबह शाम
औ देश मेरे औ देश मेरेतेरे माटी में मिल जाने का मान करता हैसरहद पर खड़े हो तिरंगे को सलामी देना अच्छा लगता है.तेरे लिए मर के अमर हो जाना अच्छा लगता है.हमेशा याद आऊंगा ये सोचना अच्छा लगता है.पर फिर भी क्यों ये जिस्म जान से जुदा नहीं होना चाहता है ,ये महसूस करना अजीब लगता है.मरने पर किये वादों का टूटना अजीब लगता है.मेरे आंगन में पसरा वो सन्नाटा अजीब लगता है.बूढ़े माँ बाप का फिर से काम करना अजीब लगता है.रोते मेरे बच्चे को देख कर ये मेरा दिल क्यों रोता है.
बेसहारा हो चूका मेरा परिवार मुझे ही ये सोचने पर मजबूर कर देता है.क्या इस के लिये जवान सीमा पर शहीद होता है
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