एक लडकी की कहानी उसी की जुबानी
आज मैंने एक कली से पुछा तुम खिलना क्यों नहीं चाहती हो.
क्यों नहीं खुशबु से अपनी ,बगिया महकाना चाहती हो.
क्यों नहीं भवरों की गुण गुण सुनना चाहती हो.
क्यों नहीं ओस की बूंदों को पीना चाहती हो.
कहना था मेरा इतना एअक,कलि खिलखिला गई.
पर अगली ही पल डर के मुरझा गई..
बोली में क्या करूँ ये जग जीने नहीं देता है
ज्योहीं में बाहर निकलू मुझी पर टूट पड़ता है
तोड़ केर मेरे पत्तो को लहूलुहान कर देते है..
कभी कभी पैरो तले कुचल देतें है ..
जानती हूँ में इस लिये नहीं खिलना है..खेलने के उम्र है मेरी मुझे बिछोना नहीं बनना है
who is this girl...
ReplyDeletewah..boy hokar b gal ki jabani heart touching poem... man gaye ustad
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